मुस्तफा जाने रेहमत पे लाखो सलाम लिरिक्स (तजमिन शुदा)

मुस्तफा जाने रेहमत पे लाखो सलाम लिरिक्स : मुस्तफा जाने रहमत पे लाखों सलाम लिरिक्स The beutifull Song is Sung by has#. the song Lyrics मुस्तफा जाने रेहमत पे लाखो सलाम लिरिक्स was realesed on Apr 2012 on youtube official YUSUF ISLAM channel

मुस्तफा जाने रेहमत पे लाखो सलाम लिरिक्स
मुस्तफा जाने रेहमत पे लाखो सलाम लिरिक्स

मुस्तफा जाने रेहमत पे लाखो सलाम लिरिक्स हिंदी में


मुस्तफा जाने रेहमत पे लाखों सलाम 

शमऐ बजमे हिदायत पे लाखों सलाम 

जिसकी अजमत पे सदके वकारे हरम 

जिसकी जुल्फों पे कुरबां बहारे हरम 

नोँश ऐ बजमे परवर दिगारे हरम 

शेहरयारे इरम ताजदारे हरम 

नोबहारे शफाअत पे लाखों सलाम 

जिसके कदमों पे सजदा करें जानवर 

मुंह से बोलें शजर दे गवाही हजर 

वो हैं मेहबूबे रब मालिके बेहरोबर 

साहिबे रुजअते  शम्सो शककुल कमर 

नाइबे दस्ते कुदरत पे लाखों सलाम 

जिसका फरमान फरमाने जां आफरीं 

पाक कानून जिसका किताबे मुबिं 

वो जो है मजहरे अहकमूल हाकेमिं 

अर्श ता फर्श है जिसका जेरे नगीं 

उसकी काहिर रियासत पे लाखों सलाम 

मुझसे बेजां की ताकत पे लाखों दुरूद 

मुझसे बेकल की राहत पे लाखों दुरूद 

मुझसे बेधर की जन्नत पे लाखों दुरूद 

मुझसे बेकस की दौलत पे लाखों दुरूद 

मुझसे बेबस की कुव्वत पे लाखों सलाम 

बेकरारों की राहत पे आअला दुरूद 

गमजदों की मसर्रत पे आअला दुरूद 

ली मअल्लाह शबाहत पे आअला दुरूद 

रब्बे आअलाकी नेअमत पे आला दुरूद 

हक तआलाकी मिनन्त पे लाखों सलाम

रेहबरे दिनो दुनिया पे बेहद दुरूद 

शाफ ऐ  रोजे उकबा पे बेहद दुरूद 

हम जइफो के मलजा पे बेहद दुरूद 

हम गरीबों के आका पे बेहद दुरूद 

हम फकीरों की सरवत पे लाखों सलाम 

लामकां की जबी बहरे सजदा जुकी 

रिफअते मंजिले अर्शे आआला जुकी 

अजमते क़िब्लऐ दिनों दुनियां जुकी 

जिनके सजदे को मेहराबे काआबा जुकी 

उन भवों की लताफत पे लाखों सलाम

पड़ गइ जिसपे मेहशर में बख्शा गया 

देखा जिस सिम्त अब्रे करम छा गया 

रुख जिधर हो गया जिंदगी पा गया 

जिस तरफ उठ गइ दम में दम आ गया 

उस नीगाहे इनायत पे लाखों सलाम 

जिसके जल्वे जमाने पे छाने लगे 

जिसकी जौ से अंधेरे ठिकाने लगे 

जिससे जुल्मत कदे नूर पाने लगे 

जिससे तारिक दिल जगमगा ने लगे 

उस चमकवाली रंगत पे लाखों सलाम 

मौजे हुस्ने तबस्सुम में गुलबारियां 

और गुलबारियों में लताफत की शां 

जिनमें कुदरत की बारीकियां हंय निहां 

पतली पतली गुले कुदस की पत्तियां 

उन लबों की नजाकत पे लाखों सलाम 

जिसके आली मकालात वहीये खूदा 

जिसके गैबी इशारात वहीये खूदा 

जिसके अल्फाज आयात वहीये खूदा 

वो दहन जिसकी हर बात वहीये खुदा 

चश्म ऐ इल्मो हिकमत पे लाखों सलाम 

रेहमते हक की होने लगीं बारिशें 

दिनो दुनियां की लूटने लगीं दौलते 

खोल दीं जिसने अल्लाह की हिकमतें 

वो जुबां जिसको सब कुन की कुंजी कहे 

उसकी नाफिज हुकूमत पे लाखों सलाम 

जिसके ताबेअ हय मकबूलिय्यत के उसूल 

मूनहसीर जिसपे हय रहमतों का नुजूल 

वो दुआ जिसपे सदके दुरुदों के फूल 

वो दुआ जिसका जो बन बहारे कुबूल 

उस नसीमे इजाबत पे लाखों सलाम 

जिनकी जौ से मिले रास्ते दूर के 

दिन फिरे बख्त शब्हा ऐ महजूर के 

जिनसे बरसें गोहर हुस्ने मस्तूर के 

जिनके गच्छे से लच्छे जणे नूर के 

उन सितारों की नजहत पे लाखों सलाम 

मुजतरीब गमसे होते हुऐ हंस पणे 

रंजसे जान खोते हुऐ हंस पणे 

बख्त जाग ऊठ्ठे सोते हुऐ हंस पणे 

जिसकी तस्की  से रोते हुऐ हंस पणे 

उस तबस्सुम की आदत पे लाखों सलाम 

जिसमें हो नदियां सीमो जरकी रवां 

जिसमें मौजें हो आबे गोहर की रवां 

जिसमें लेहरें हो हुस्ने कमर की रवां 

जिसमें नेहरें हो शिरो शकर की रवां 

उस गलेकी नजारत पे लाखों सलाम 

दिनो दुनिया दीये माल और जर दिया 

हूरो गिल्मां दीये खुल्दो कौसर दिया 

दामने मकसदे जिन्दगी भर दिया 

हाथ जिस सिम्त उठ्ठा गनी कर दिया 

मौजे बेहरे समाहत पे  लाखों सलाम 

डूबा सूरज किसीने भी फेरा नहीं 

कोइ मिस्ले यदुल्लाह देखा नहीं 

जिसकी ताकत का कोइ ठिकाना नहीं 

जिसको बारे दो आलम की परवा नहीं 

ऐसे बाजूकी कुव्वत पे लाखों सलाम 

फर्क मतलुबो तालिब का देखे कोइ 

किस्सऐ  तुरो मेअराज समझे कोइ 

कोइ बेहोश जल्वों में गुम हय कोइ 

किसको देखा ये मूसा से पूछे कोइ 

आँख वालों की हिम्मत पे लाखों सलाम 

आसियों की भलाइ के चमके हिलाल 

कैदे गमसे रिहाइ के चमके हिलाल 

जल्वऐ मुस्तफ़ाइ के चमके हिलाल 

इंदे मुश्किल कुशाइ के चमके हिलाल 

नाखुनों की बशारत पे लाखों सलाम 

आस्मां मिल्क और जव की रोटी गिजा 

लामकां मिल्क और जव की रोटी गिजा 

कुनफकां  मिल्क और जव की रोटी गिजा 

कुल जहां मिल्क और जव की रोटी गिजा 

उस शिकम की कनाअत पे लाखों सलाम 

बेबसों की कयादत पे खिंचे कर बंधी 

बेकसों की रिफाकत पे खिंच कर बंधी 

आसियों की इआनत पे खिंच कर बंधी 

जो के अजमे शफाअत पे खिंच कर बंधी 

उस कमर की हिमायत पे लाखों सलाम 

कआब ऐ दिनो दिल यानी नक्शे कदम 

जिनकी अजमत नही अर्शे आजमसे कम 

हर बुलन्दी का सर हो गया जिस पे खम 

खाइ क़ुरआंने  खाके गुजर की कसम 

उस कफे पा की हुरमत पे लाखों सलाम 

जब हुवा जवफिगन दिनो दुनिया का चाँद 

आया खलवत से जलवत में असरा का चाँद 

निकला जिस वकत मसउदो बतहा का चाँद 

जिस सुहानी धणी चमका तयबा का चाँद 

उस दिल अफरोज साअत पे लाखों सलाम 

मिस्ले मादर हलीमा पे ऐहसां करें 

उनकी बख्शीस का तिफली में सामां करें 

पास हक के रजाअत का हर आं करें 

भाइयों के लीये तर्के पिस्तां करें 

दूध पीतों की निसफत पे लाखों सलाम 

जिसके जेरे नगीं हंय समाको समक 

जिसके हल्के में हंय चाँद सूरज फलक 

जिसका सिकका रवां फर्श से अर्श तक 

जिसके धेरेमें हंय अंबिया व मलक 

उस जहांगीरी बआशत पे लाखों सलाम 

खुदसरों की तनी गरदने जूक गइं 

सरकशों की उठी गरदने जूक गइं 

थीं जो ऊंची वही गरदने जूक गइं 

जिसके आगे खिंची गरदने जूक गइं 

उस खुदादाद शौकत पे लाखों सलाम 

उनकी हैबत से वो कपकपाती जमिं 

डर से पैहम पसीने बहाती जमिं 

गूँज से ख़ौफ शेरों की खाती जमिं 

शोरे तकबीर से थरथराती जमिं 

जुंबिशे जिशे नुसरत पे लाखों सलाम 

किस कदर हय हसीं बद्रका मआरेक 

अव्वलीं बाब तारीखे इस्लाम का 

लब पे नुसरत के नसरूम मिनल्लाह था 

वो चकाचाक खंजर से आइ सदा 

मुस्तफा तेरी सवलत पे लाखों सलाम 

उनके पाकीजा गेसू पे लाखों दुरूद 

उनकी अंबर फशां बु पे लाखों दुरूद 

उनके आइनऐ रु पे लाखों दुरूद 

अलगरज उन के हर मु पे लाखों दुरूद 

उनकी हर खू व खसलत पे लाखों सलाम 

फर्श पर थी मगर अर्श मंजिल हूइ 

यानी जल्वा गहे हुस्ने कामिल हूइ 

अर्शवाले के जलवों की हामिल हूइ 

अर्श से जिस पे तस्लीम नाजिल हूइ 

उस सराऐ सलामत पे लाखों सलाम 

उस नजर का मुकद्दर है किस औज पर 

उसकी तकदीर हय किस कदर बख्तवर 

उस नजर पर फिदा ताबे चश्मे सहर 

जिस मुसलमां ने देखा उन्हें ऐक नजर 

उस नजर की बसारत पे लाखों सलाम 

कुल शहीदाने बदरो उहद पर दुरूद 

सब फिदायाने बदरो उहद पर दुरूद 

जिशे मरदाने बदरो उहद पर दुरूद 

जांनिसाराने बदरो उहद पर दुरूद 

हक गुजाराने बयअत पे लाखों सलाम 

वो उमर वो हबीबे शहे बेहरोबर 

वो उमर खास ऐ हाशमी ताजवर 

वो उमर खुल गऐं जिस पे रेहमत के दर 

वो उमर जिसके आअदा पे शयदा शकर 

उस खूदा दोस्त हजरत पे लाखों सलाम 

जिनका कौसर हय जन्नत हय अल्लाह की 

जिनके खादिम पे शफकत हय अल्लाह की 

दोस्त पर जिनके रेहमत हय अल्लाह की 

जिनके दुश्मन पे लआनत हय अल्लाह की 

इन सब ऐहले मोहबब्त पे लाखों सलाम 

खुखे प्यासों का गम किस कदर दिलमें था 

आया साइल तो मुंह का निवाला दिया 

बादशाहों ये शाही तो देखो जरा 

कुल जहां मिल्क और जव की रोटी गिजा 

उस शिकम की कनाअत पे लाखों सलाम 

अफसरे लश्करे फातेहाने जमन 

तेग इन्ना फतहना हय जौहर फिगन 

बाजू ऐ मुस्तफा पंजऐ पंजतन 

शेरे शमशीरजन शाहे खैबर शिकन 

परतवे दस्ते कुदरत पे लाखों सलाम 

हक के मोहरीम इमामुत्तका वननुका 

जाते अकरम इमामुत्तका वननुका 

कुत्बे आलम इमामुत्तका वननुका 

गौसे आजम इमामुत्तुका वननुका 

जल्व ऐ शाने कुदरत पे लाखों सलाम 

जितने तारे हैं उस चर्खे जीजाह के 

जिस कदर माह पारे हैं उस माह के 

जांनर्शी जो हैं मर्दे हक आगाह के 

और जितने हैं शहेजादे उस शाह के 

इन सब ऐहले मकानत पे लाखों सलाम 

रीफअतो शौकतो शानो औजो कलाम 

अजमतो हयबतो इज्जो जाहो जलाल 

ताबिशो तलअतो नुरो हुस्नो जमाल 

नामो कामो तनो जानो हालो मकाल 

सब में अच्छे की सूरत पे लाखों सलाम 

जिसकी सरकार है बारगाहे कुबूल 

जिसके दरबार में औलिया हैं शुमुल 

जिस पे है रेहमते मुस्तफा का नुजूल 

हजरत हमजाह शेरे खुदा व रसूल 

जिनते कादरिय्यत पे लाखों सलाम 

ऐसी बरतर हूइ गरदने अवलिया 

औजे मेह पर हूइ गरदने अवलिया 

अर्श बर सर हूइ गरदने अवलिया 

जिसकी मिम्बर हूइ गरदने अवलिया 

उस कदमकी करामत पे लाखों सलाम 

मैं भी हूं ऐक गदाऐ दरे अवलिया 

मैं भी हूं ऐक सगे कुऐ गौसुलवरा 

मैं भी हूं जर्रऐ कुछ ऐ मुस्तफा 

तेरे उन दोस्तों के तुफैल ऐ खूदा 

बंद ऐ नंगे खलकत पे लाखों सलाम 

है खुदाया करमबार तेरी जनाब 

अज तुफयले जनाबे रिसालत मआब 

वोह के जिनका है यासीनो त्वाहा खिताब 

बेअजाबो इताबो हिसाबों किताब 

ता अबद ऐहले सुन्नत पे लाखों सलाम 

अबरे जुदो अता किस पे बरसा नहीं 

तेरा लुतफो करम किस पे देखा नही 

किस जगा और कहां तेरा कबजा नही 

ऐक मेरा ही रेहमत पे दाअवा नहीं 

शाह की सारी उम्मत पे लाखों सलाम 

तेरी रेहमत रहे उन पे परतव फिगन 

उन पे हो सायऐ लुतफे शाहे जमन 

देर तक ये दरख्शां रहे अंजुमन 

मेरे उस्ताद मां बाप भाइ बहन 

ऐहले वल्दो अशीरत पे लाखों सलाम 

आफताबे कयामत के बदले हों तौर 

जबके हो हर तरफ नफसी नफसीका दौर 

जब किसीको न हो फुरसते फिकरो गौर 

काश मेहशरमें जब उनकी आमद हौ और 

भे जें सब उनकी शौकत पे लाखों सलाम 

मुर्शदी शाह अहमद रजाखां रजा 

फैजयाबे कमालात हस्सां रजा 

साथ अख्तर भी हो जमजमांख्वां रजा 

मुझसे खिदमत के कुदसी कहे हां रजा 

मुस्तफा जाने रेहमत पे लाखों सलाम

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